- अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन क्या है?

क्या आप जानते हैं यह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन क्या है यह कितना बड़ा है यह अंतरिक्ष में कैसे पहुंचाया गया, इसमें कितने लोगों के रहने की व्यवस्था होती है! यह कितने बेडरूम और बाथरूम है यहां पर अंतरिक्ष यात्री क्या करने जाते हैं ,और साथ ही जानेंगे कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर जीवन कैसा होता है!
- अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन
स्पीड 28163 (kmp/h)
इसमें मौजूद कमरे 6 कमरे दो बाथरूम और एक जिम
शॉर्ट नाम ISS (अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन)
पृथ्वी से ऊंचाई 403 किलोमीटर
कितने लोगो टीम मौजूद होती है 67
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का वजन 4 लाख 53592 किलोग्राम
इसको बना ने का कुल खर्चा 160 अरब डॉलर (11 लाख करोड रुपए)
कितने देशोंने बनाया 5
इसके सोलर पैनल्स कितनी उत्पन करते है? 120 किलो वोल्ट
इसमें कितनी खिड़किया है? 15 खिड़किया
- तो चलिए आज हम बताते हैं,
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन अंतरिक्ष में मौजूद वह स्टेशन है, जहां अंतरिक्ष में जाने वाली सवारियां उतरती है, यहां पर रहकर विज्ञान के बड़े-बड़े एक्सपेरिमेंट करती है, अगर आप समझ रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन किसी रेलवे स्टेशन अथवा एयरपोर्ट जैसा अंतरिक्ष में कोई स्थाई ताजा है तो गलत है इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन कोई स्थाई ढांचा नहीं बल्कि 28000 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से लगातार पृथ्वी का चक्कर लगाने वाला अंतरिक्ष में मौजूद एक बड़ा अंतरिक्ष यान जैसा है!
- रफ्तार
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यात्रियों का 28000 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलता फिरता घर भी कह सकते हैं, जिसमें अंतरिक्ष यात्रियों के खाने पीने और पॉटी करने जैसी हर जरूरी सुविधा उपलब्ध है, यहां पर अंतरिक्ष यात्रियों के रहने के लिए 6 कमरे दो बाथरूम और एक जिम भी उपलब्ध है,
अंतरिक्ष स्टेशन को हिंदी में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन इंग्लिश में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन वहीं शॉर्ट में (ISS) कहा जाता है, यह अंतरिक्ष में ऐसा स्थान है जहां पर अंतरिक्ष यात्री रहकर अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े कई रहस्य को सुलझाने की कोशिश करते हैं!
इसका सबसे खास मकसद अंतरिक्ष में इंसानों के रहने का असर पड़ता है जहां दिन रात और गुरुत्वाकर्षण का अंतर होने की वजह से अंतरिक्ष यात्रियों के शरीर पर कई ऐसे प्रभाव पड़ते हैं जिनके बारे में दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसी लगातार रिसर्च कर रही है!
- अंशु शुक्ला की जाने की वजह
अंशु शुक्ला भी कैंसर का इलाज तथा मांसपेशियों के कमजोर या आसान भाषा में करें तो पूरा होने पर जो मांसपेशियां कमजोर हो जाती है! क्या उनको किसी इलाज के साथ रोका जा सकता है इस सहित अन्य प्रयोगों पर रिसर्च करने गए हैं!
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पृथ्वी से 403 किलोमीटर की ऊंचाई पर मौजूद है! इस प्रकार बेडरूम वाले घर दो 747 जेट लाइन जितना है!
यहां 67 लोगों की टीम और कुछ मेहमान एक साथ रह सकते हैं, इस वक्त अंतरिक्ष स्टेशन में शुभांशु शुक्ला सहित 11 लोग मौजूद है!
- अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का वजन
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का वजन लगभग 10 लाख पाउंड यानी की 4 लाख 53592 किलोग्राम है! यह 320 कारों के वजन के बराबर है अगर इसके सभी स्कोर को मिलकर इसका आकार मापा जाए तो इसकी लंबाई फुटबॉल मैदान के बराबर या उससे ज्यादा ही होगी!
- अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को कैसे बनाया गया है?
आपको जानकर हैरानी होगी अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को एक बार में अंतरिक्ष में ले जाकर स्थापित नहीं कर दिया गया बल्कि 1998 से लेकर 2011 तक 136 बार अमेरिकी रॉकेट, रशियन रॉकेट, और जापानी रॉकेट ने उड़ान भरी तब जाकर इसके अलग-अलग टुकड़ों को अंतरिक्ष में ले जाकर जोड़ा गया! अलग-अलग टुकड़ों को जोड़ने के बाद आज जो अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को आप देख रहे हैं वह जाकर तैयार हुआ है! अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन अंतरिक्ष में मानव तकनीकी का एक सबसे महंगा और सबसे बड़ा उदाहरण है!
- इस पर कुल खर्चा
इस पर कुल 160 अरब डॉलर का खर्चा आया था जो भारतीय करेंसी में लगभग 11 लाख करोड रुपए से ज्यादा के बराबर है!
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पांच देशों ने मिलकर बनाया है जिसमें अमेरिका की नासा, रूस की रोसकॉस्मोस, जापान की जाक्सा, यूरोप की ESA, और कनाडा की CSA अंतरिक्ष एजेंसी शामिल है!
- अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की ऑक्सीजन सिस्टम
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में ऑक्सीजन के लिए ऑक्सीजन जनरेशन सिस्टम लगा है जो पानी से ऑक्सीजन बनाकर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर ऑक्सीजन की पूर्ति करता है! और कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकालने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड रिमूवल असेंबली होता है!
पानी की पूर्ति अंतरिक्ष यात्रियों के पेशाब से निकली बाफ़ का इस्तेमाल कर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में मौजूद सिस्टम से रीसाइकलिंग करके पानी में बदल दिया जाता है! अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर बड़े-बड़े सोलर पैनल्स लगे हैं जो 120 किलो वोल्ट तक बिजली उत्पन्न करते हैं! जिसे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर मौजूद रिचार्जेबल बैटरी में स्टोर किया जाता है! पूरे दिन यह संचालित होता है सोलर पैनल वैज्ञानिक उपकरणों से लेकर चालक दल की दैनिक जरूर तक सभी महत्वपूर्ण ऑक्सीजन जनरेशन सिस्टम और पानी रीसायकल करने वाले सिस्टम के साथ ही कार्बन डाइऑक्साइड साफ करने वाली मशीनों को भी बिजली देते हैं! सोलर पैनल्स का आकार बड़े प्लेन जितना है!
- अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्पीड
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्पीड अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन 17520 प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की परिक्रमा करता है इसे किलोमीटर में करें तो इसका मतलब होगा 28163 (kmp/h) किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पृथ्वी की परिक्रमा करता है! पृथ्वी के चक्कर लगाने की वजह से सूर्योदय और 16 बार सूर्यास्त देखने का अनुभव होता है कि यहां 90 मिनट का दिन और 90 मिनट की रात होती है और ऐसा 24 घंटे में 16 बार होता है!
- स्पेस का टाइम सर्कल
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर एक बार में एस्ट्रोनॉट्स रह सकते हैं एक बार जाने के बाद यहां एस्ट्रोनॉट को कम से कम 6 महीने रुकना पड़ता है इस समय पूरा होने से पहले ही दूसरे भेज दिये जाते है, जो पुराने की जगह लेता है! वह जल्द ही वापस आ जाता है!
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में गए हैं इन सभी अंतरिक्ष यात्रियों के लिए जरूरी सामान पहुंचाने के लिए कार्गो स्पेस फ्लाइट होती है! यहां रहते हुए आप अपने शरीर को महसूस नहीं कर सकते हैं इसलिए सारी चीज हवा में तैरती रहती है!
- स्पेस में होती हुई तकलीफे
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर आप उल्टे हो जाए या सीधे आपको कोई सेंसेशन महसूस नहीं होती है! बस देखने वाले को लग सकता है कि सामने वाला इंसान सीधा है या फिर उल्टा, खाने की यहां पर सभी चीज कार्गो स्पेस फ्लाइट के द्वारा पृथ्वी से डिहाइड्रेटेड फॉर्म में समय-समय पर पहुंचाई जाती है! पेशाब के लिए शौचालय शौचालय में और पोटी के लिए पृथ्वी जैसे ही एक सीट लगी होती है, यहां पर ट्रेन की डिब्बे जैसी एक सीट पर लेट कर आपको इसमें अपने आप को पैक करके बांधना होता है!
क्योंकि अगर आपने अपने आप को नहीं बांधा तो आप इधर से उधर हवा में उड़ने लगेंगे! अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में लगभग 15 खिड़किया होती है, जहां से अंतरिक्ष यात्री बाहर देख सकते हैं इसी के साथ एक खिड़की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर ऐसी होती है जो 360 डिग्री व्यू प्रदान करती है यानी आसान भाषा में कहें तो वे इस चारों तरफ देखा जा सकता है क्योंकि यहां पर एक साथ काफी सारी खिड़कियां है!