मुथैया मुरलीधरन: क्रिकेट के सबसे महान स्पिनर की कहानी

Table of Contents

Toggle

मुथैया मुरलीधरन

मुथैया मुरलीधरन का जन्म 17 अप्रैल 1972 को श्रीलंका के कैंडी से कुछ दूरी पर स्थित कुंडा साले के एक गांव नत्ताराम पोथा की  कोंगु वेल्लालर जाति में हुआ था, मुरलीधर  स्वामी मुखिया और लक्ष्मी के चार बेटों में सबसे बड़े थे,  मुरलीधरन मूल रूप से भारतीय है, मुरलीधरन के दादा पेरियास्वामी 1920 में चाय के बागानों में काम करने के लिए दक्षिण भारत से श्रीलंका गए थे और वही बस गए, मुरलीधरन के दादा की आंखों में मुरली को विश्व का सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर बनने का ख्वाब पल रहा था, परिणाम स्वरुप मुरलीधरन को 9 साल की उम्र में कैंडी के एंथोनी कॉलेज में भेज दिया गया !न 

 

स्कूल के शुरुआती दिन

मुरली स्कूल की शुरुआती दिनों में तेज गेंदबाज ऑलराउंडर की भूमिका निभाते थे, स्कूल के शुरुआती दिनों में तेज़ गेंदबाज़ी करते देखा स्कूल के कोच सुनील फर्नांडो ने उन्हें ऑफिस पिन  पर ध्यान देने के लिए कहा, मुरली ने कोच की निगरानी में ऑफिस पिन की बरिकीओ पर काम करना शुरू किया, मुरली ने 9 से अधिक विकेट लेकर एंथनी कॉलेज  के अंतिम दो सीजन अपने नाम किये!

20 साल की उम्र में श्रीलंका टेस्ट टीम के लिए खेलना

1999 – 91 सत्र में  व्हाइट क्रिकेटर ऑफ द ईयर चुने जाने के बाद मुरली का चयन तमिल यूनियन क्रिकेट एंड ऑथेंटिक क्लब में हो गया, मुरली की गेंदबाजी की चर्चा श्रीलंका क्रिकेट के गलियारों में गुजने लगी, साल 1992 में एलोम बॉर्डर नेतृत्व में ऑस्ट्रेलियाई टीम टेस्ट श्रृंखला खेलने श्रीलंका आई, श्रृंखला से पहले अभ्यास मैच में मोरली ने  मशहूर ऑस्ट्रेलिया बल्ले बाज़ी को धसत्व कर दिया!

मोरली ने प्रदर्शन की मदद से से मात्र 20 साल की उम्र में श्रीलंका टेस्ट टीम के लिए  28 अगस्त 1992 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ किया, मुरली श्रीलंका के लिए खेलने वाले पहले भारतीय मूल के खिलाड़ी बने, मैच में मोरली सिर्फ 3 विकेट हासिल कर पाए, अपने  पहले ही मैच में कंधे का इस्तमाल करते हुए टॉम बॉडी जैसे बल्लेबाज को बोल्ड कर मोरली ने अपनी क्षमता का परिचय दिया,और टेस्ट में श्रीलंका की टीम का प्रमुख हथियार बन गए, टेस्ट मैच के करीब 1 साल बाद 12 अगस्त 1993 को भारत के विरुद्ध वन डे मैच किया, साल 1995 में न्यूजीलैंड दौरे पर डाउनलोडिंग टेस्ट में घास वाली पेज पर पांच विकेट लेकर विदेशी धरती पर श्रीलंका की टीम को पहले टेस्ट जीत दिलाने में मुरली ने अहम योगदान दिया, मुरली  द्वारा किए गए बेहतरीन परदर्शन में रहता है चुनौतियों का पहाड़ खड़ा कर दिया बॉक्सिंग डेट टेस्ट से पहले मुरलीधरन ने 32.74 की साधारण अवसर से 22 टेस्ट मैचो में 80 विकेट लिए, इसके बावजूद भी और श्रीलंका के प्रमुख स्पिनर द बॉक्सिंग टेस्ट के पहले दिन का खेल चल रहा था!

 

मुरलीधरनअपना पहला स्थल खेल रहे थे कि तभी अंपायर ने नो बॉल देना शुरू कर दिया, उनके हिसाब से मुरलीधर गीत देखने के दौरान अपनी बात को मोड रहे थे, बड़ी एक्शन के चलते दो में 55239 दर्शक मौजूद उसे टेस्ट में लाइव कमेंट्री कर रहे धोनी ग्रैंड ने कहा था यह घटना इस नौजवान का कैरियर समाप्त कर सकती है, नियमों के बेरोज जाकर नोबेल दे रहे थे मैच के बाद आईसीसी ने मुरलीधरन के एक्शन की जांच के लिए आदेश दिए साल 1996 में पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय और हांगकांग यूनिवर्सिटी आफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में बायोकेमिकल विश्लेषण के बाद पता चला की मुरली की गेंदबाजी एक्शन से दृश्य भ्रम पैदा करती है, इस विश्लेषण के बाद आईसीसी द्वारा मूल्य धर्म के एक्शन को मंजूती दे दी गई, इसी साल हुए विश्व कप मुरलीधर ने 7 विकेट हासिल की और श्रीलंका को विश्व विजेता बनने में योगदान दिया, टेस्ट घटना को 4 साल ही हुए थे कि डिलीट में श्रीलंका बनाम इंग्लैंड वनडे मैच के दौरान अंपायर रोज इमारेशन में मुरली को ठोकने के लिए नो बॉल देना शुरू किया, मुरली की माने तो यह उनके क्रिकेट करियर का सबसे मुश्किल दौर था, मैदान में अंपायर और बाहर ऑस्ट्रेलिया दर्शक उनके विरोध में थे, इस घटना के बाद आईसीसी ने नियमों में संशोधन करते हुए स्पिन गेंदबाजी के दौरान हाथ मोड़ने की 5% छूट को 15% कर दिया, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री द्वारा उन्हें चक्र कहे जाने पर साल 2004 में मुरली ने  स्टील आर्म्रेस्ट पहनकर साबित किया कि उनके एक्शन में कोई कमी नहीं है!

 5 फुट 7 इंच के मुरलीधर क्रिकेट इतिहास में कलाई द्वारा ऑफ स्पिन करने वाले पहले ऑफिस स्पिनर थे, मुरली   के तरकश में पारंपरिक का हस्बैंड पकड़ने वाली ऑफिस ट्रेन टॉप स्पीड और दूसरा गेट थी, साथ उनके खुले कंधे के एक्शन से उनको पढ़ पाना भी किसी बल्लेबाज के लिए आसान नहीं था, मुरली की कलाई का लचीलापन उनकी जीत को हर प्रकार की सतह पर टर्म प्राप्त करने में मदद करता था,  मुरली सीमेंट पर भी गेट टर्न कर सकते हैं, 52 टेस्ट माचो में 26. 20 की औसत से 278 विकेट लेना मैं इसके कथन को सही साबित करता है, बोल फेकते वक्त मुरली की आँखे ऊपर हो जाती थी, जिसका जिक्र करते हुए मोहम्मद कैफ ने कहा था मुझे समझ नहीं आता की मुरली की आंखें देखूं क्या उनका हाथ!

519 टेस्ट विकेट के रिकॉर्ड को पार किया

 साल 2004 में मुरलीधरन ने जिंबॉब्वे के अंकाला  का विकेट लेकर वेस्टइंडीज के सर्वाधिक 519 टेस्ट विकेट के रिकॉर्ड को पार किया, इसी साल शनिवार सर्वाधिक टेस्ट विकेट लेने के मामले में मुरलीधरन से आगे निकल गए, क्रिकेट करियर का सबसे कामयाब साल साबित हुआ, इस दौरान एक समान होने लगातार टेस्ट माचो में 10 या 10 से अधिक विकेट लेने का दुर्लभ कारनामा दूसरी बार किया, मुरलीधर को क्रिकेटर इन थे वर्ल्ड चुना गया,  साल 2000 में भी मुरलीधरन को यह सम्मान प्राप्त हुआ था, साल 2007 में कॉलिंग वुड के विकेट के साथ मुरलीधरन टेस्ट क्रिकेट में शेन वार्न के सर्वाधिक 708 विकेट के रिकॉर्ड को पार कर सर्वाधिक टेस्ट विकेट लेने वाले गेंदबाज बने!

साल 2009 में मुरलीधरन ने अपने 327 में एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच में युवराज सिंह के विकेट के साथ वन डे में वसीम अकरम के सर्वाधिक 502 विकेट का 50 ओवर क्रिकेट में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज़ बने !



 मुरली ने  सीरीज के पहले टेस्ट के बाद उसे समय संन्यास की घोषणा की जब वो 800 विकेट के जादुई आंकड़े से 8 विकेट दूर थे,  विश्व क्रिकेट उसे मैच पर निगाह जमाया बैठा था !

 

मुरली ने अपने टेस्ट करियर की आखिरी गीत पर 800 विकेट हासिल कर सभी क्रिकेट प्रेमियों को यादगार अलविदा कहा ! मुरलीधरन ने  अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच 2011 विश्व कप फाइनल के रूप में खेला, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के समय मुरलीधर ने 113 टेस्ट मैचों में 22.73 से 800 विकेट लिए, जीसमे 67 बार 5 विकेट लिए, 22 बार टेस्ट में 10 विकेट लिए, और सर्व श्रेष्ठ टेस्ट प्रदर्शन 220 रन देकर 16 विकेट!

30 रन देकर 7 विकेट उनका  सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

मुरलीधरन ने 350 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच में 23.08 की और सबसे 534 विकेट लिए, एक बारी में 30 रन देकर 7 विकेट उनका  सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है, मुरली ने केवल 12 अंतर्राष्ट्रीय T20 में 13 विकेट लिए हैं, 2008 से 2016 के दौरान बेंगलुरु, चेन्नई और कोच्चि के लिए आईपीएल में 66 मैच खेलकर 26.33 की औसत से 64 विकेट लिए,  मुरलीधर्म ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 1347 विकेट लेने के लिए 63132 गेंदे डाली है, मुरलीधरन एक ऐसा नाम है जो क्रिकेट गेंदबाजी के हर रिकॉर्ड में शान से बैठा मिलेगा,  मुरली के आंकड़े उसे गेंदबाजी का डॉन ब्रैडमैन बनाते हैं,  वह अपने कामयाब क्रिकेट करियर के लिए उनसे जुड़े प्रत्येक व्यक्ति और खास तौर पर उनकी पत्नी माधिमिता राम मूर्ति को श्रेय देते हैं, संन्यास के बाद मुरलीधर 2016 में आईपीएल टीम सनराइज हैदराबाद के साथ बॉलिंग कोच के रूप में भी जुड़े ! 


2015 में ऑस्ट्रेलिया में कोचिंग स्टाफ के साथ

साल 2015 में ऑस्ट्रेलिया में कोचिंग स्टाफ के साथ जुड़े, वर्तमान में मुरलीधर फाउंडेशन लाभ संगठन के साथ जोड़कर जरूरतमंद बच्चों तक शिक्षा भोजन  प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने में व्यस्त है, इसी दुआ के साथ की क्रिकेट के मैदान की तरह जिंदगी में भी मुरली कठिनाइयों को बोल्ड मारते रहे !

 

अधिक पढ़ें – https://zeenews.india.com/hindi/sports/cricket/muttiah-muralitharan-life-was-saved-by-20-minutes-story-will-shock-you-everything-destroyed-in-tsunami/2479378

मुरलीधरन जैसे महान खिलाड़ियों के पीछे इतिहास होता है। अगर आप जानना चाहते हैं कि इंसान और पृथ्वी का सफर कैसे से शुरू हुआ, तो ये पोस्ट ज़रूर पढ़िए:

https://dailyonline.news/%e0%a4%a1%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a4-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%87%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%8b/

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *